आयुर्वेद में सहजन  या ड्रमस्टिक या मोरिंगा के फायदे (sahajan moringa drumstick in hindi)

आयुर्वेद में सहजन या ड्रमस्टिक या मोरिंगा के फायदे (sahajan moringa drumstick in hindi)

आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार मोरिंगा का उपयोग स्तंभन दोष, गर्भावस्था और एलर्जी की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए। यह आंखों  स्वास्थ्य , स्पर्म काउंट बढ़ाने , सिरदर्द और जोड़ों के दर्द के लिए अच्छा है।


Read this article in English Ayurveda Health Benefits of Drumsticks or Moringa or drumstick

विषयसूची

मोरिंगा या सहजन  और आयुर्वेद

मोरिंगा के आयुर्वेद औषधीय गुण

आयुर्वेद में सहजन  या मोरिंगा के स्वास्थ्य लाभ

क्या Drumstick या सहजन  का उपयोग गर्भावस्था में किया जा सकता है?

सहजन  के दुष्प्रभाव या साइड इफेक्ट्स।

आयुर्वेद में मोरिंगा या सहजन

आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार मोरिंगा का उपयोग स्तंभन दोष, गर्भावस्था और एलर्जी की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए। यह आंखों स्वास्थ्य , स्पर्म काउंट बढ़ाने , सिरदर्द और जोड़ों के दर्द के लिए अच्छा है।

मोरिंगा का एक वानस्पतिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा है। यह moringaceae परिवार से संबंधित है। इसे हिंदी में सहजिन या मुनगा, तमिल में मुरुंगई, तेलुगु में मुनगाकाई, कन्नड़ में नुग्गेकाई और अंग्रेजी में ड्रमस्टिक्स या मोरिंगा के नाम से जाना जाता है।

सहजन  के स्वास्थ्य लाभों को आयुर्वेद के ग्रंथों में बताया गया है। मोरिंगा के बीज, पत्ते, फल और तेल के विभिन्न उपयोग हैं। इस पेड़ के फलों और पत्तियों का उपयोग विभिन्न व्यंजनों में किया जाता है।

आयुर्वेद आचार्य इसके औषधीय उपयोगों के आधार पर विभिन्न संस्कृत पर्यायवाची शब्दों के साथ इस पौधे का स्तवन करते हैं।

शोभांजना  – बहुत शुभ वृक्ष
शिग्रु  – मजबूत, भेदी गुण हैं
तीक्ष्ण गंधा  – मजबूत और तीखी गंध
अक्शीवा  – नशा से छुटकारा दिलाता है
मोचका  – रोगों को ठीक करने में मदद करता है

भारतीय भाषाओं में सहजन

तमिल: मूरिंगक्काई
मलयालम: मुरींगकाया, मुरींगका
तेलुगु: मुन्नाकाया, मुनगाकयालु, मुलकु कड़ा, मुनगा
कन्नड़: नुग्गेकाई
हिंदी: सज्जन की फल्ली, सौगन, शिंगा, सेगवा, सहजन
बंगाली: सजने दौता , सजना दंता
गुजराती: सरगवाणी शिंग, सरअगावो, सुरगावो
कोंकणी: मसिंगसांग मोस्का सांग
मराठी: शेवागा, शेंग, शीरेंगा
उड़िया: सजना छिन
पंजाबी: सवनजना
तुलु : नोर्गे

मोरिंगा या सहजन के आयुर्वेद औषधीय गुण

आयुर्वेद में ड्रमस्टिक को “शोभंजना” या “शिग्रु” केहते  है। आयुर्वेद के ग्रंथ इस पौधे के कई औषधीय गुणों की व्याख्या इसतरह करते हैं।

आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार ड्रमस्टिक या सहजन  में कटु रस या तीखा स्वाद और तिक्त  रस या कड़वा स्वाद होता है। यह शरीर का गर्मी बढ़ाता  है। यह पचाने के लिए हल्का होता है (लघु ) और शरीर मे सूखापन (रूक्षता) प्रदान करता है। इसमें मजबूत छेदन गुण (तीक्ष्ण ) होता है जो शरीर में जल्दी फैलता है। मोरिंगा पित्त दोष को बढ़ाता है और वात दोष और कफ दोष को कम करता है।

आयुर्वेद के अनुसार सहजन सी होनेवाले फायदे

उपयोग किए गए भाग:

ड्रमस्टिक की जड़ की छाल, तने की छाल, पत्ते, फल और बीज चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाते हैं। उनके अपने अद्वितीय औषधीय गुण हैं। आयुर्वेद आचार्य इस पौधे के स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार बताते हैं।

मोरिंगा के बीज स्तंभन दोष के लिए नहीं इस्तेमाल करना चाहिए :

आयुर्वेद आचार्यों का कहना है कि सहजन  के बीज पुरुषों की शक्ति को कम कर सकते हैं। वे कामोद्दीपक नहीं हैं और स्तंभन दोष में मदद नहीं करते हैं। इसलिए आयुर्वेद आचार्य स्तंभन दोष और कम शुक्राणुओं की संख्या और शुक्राणु के कम गतिशीलता जैसी स्थितियों में इसकी अनुशंसा नहीं करते हैं।

मोरिंगा  बीज नेत्र स्वास्थ्य के लिए (चाक्षुष्य):

इस पौधे के बीज आंखों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। काजल भारत में लोकप्रिय है। यह आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए आई लाइनर की तरह लगाया जाता है और औषधीय उद्देश्य के लिए भी उपयोग किया जाता है। शिग्रू या ड्रमस्टिक के बीजों से तैयार काजल का उपयोग आंखों के कई रोगों में किया जाता है। अध्ययन बताते हैं कि ड्रमस्टिक में उत्कृष्ट रोगाणुरोधी गुण हैं। इसलिए इस को उपयोग करने से आंखों की सूजन को कम करने और आंखों के संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है।

जहर को कम करने के लिए सहजन  के बीज (विषघ्न ):

आयुर्वेद के ग्रंथों में किसी व्यक्ति के जहर होने पर ड्रमस्टिक के बीज के उपयोग की सलाह दी जाती है। वनस्पतिशास्त्री ड्रमस्टिक बीज और पत्तियों के एंटीऑक्सीडेंट गुणों की प्रशंसा करते हैं। इसलिए वे शरीर को डिटॉक्सीफै  करते हैं और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालते हैं। यह एक अच्छा आयुर्वेदिक डिटॉक्स हर्ब है।

क्या सहजन  का उपयोग गर्भावस्था में किया जा सकता है ?

ड्रमस्टिक फल पोषक तत्वों का भंडार गृह है। यह प्रोटीन, विटामिन, खनिज और एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर है। गर्भावस्था में केवल फलों का उपयोग किया जा सकता है। यह गर्भावस्था मे पत्तियों, फूलों, छाल और जड़ इस्तेमाल  नहीं करना चाहिए है क्योंकि वे गर्भाशय के संकुचन का कारण हो सकते हैं।

मोरिंगा या सहजन  के साइड इफेक्ट्स।

  1. सहजन  की जड़ों और अर्क का उपयोग कभी न करें। इससे लकवा और मौत हो सकती है।
  2. गर्भावस्था के दौरान ड्रमस्टिक झाड़  के हिस्सों का सेवन नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे गर्भाशय के संकुचन का कारण हो सकते हैं।
  3. स्तनपान कराने वाली माताओं में  फलों और पत्तियों का उपयोग उचित नहीं है।
  4. गुर्दे की समस्याओं से पीड़ित व्यक्तियों को अपने आहार में ड्रमस्टिक शामिल नहीं करना चाहिए।
  5. यदि आप पहली बार मोरिंगा का उपयोग कर रहे हैं, तो कम मात्रा में खाएं। कुछ लोग इस पौधे के फल और
  6. पत्तियों का सेवन करने के बाद गंभीर एलर्जी विकसित कर सकते हैं।
  7. दवा के रूप में इस पौधे के भागों का उपयोग करने से पहले एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें।

 

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